दुनिया का पहला इंसान कौन था और वह कैसा था?
क्या आप जानते हैं?
जब धरती पर इंसान का वजूद न था सिर्फ पेड़ पौदे हुआ करते थे ना ही कोई जानवर था, तब अल्लाह ने इंसान को पैदा करना चाहा और फरिश्तों से मशवरा किया कि ऐ फरिश्तो मैं जमीन पर अपना नायब बनाने वाला हूं तो फरिश्तों ने कहा ऐ अल्लाह तू ऐसे को अपना नायब बनाने वाला है जो जमीन पर फसाद करेगा तेरी इबादत के लिए तो हम ही काफी हैं तब अल्लाह ने फरमाया ऐ फरिश्तो जो मैं जानता हूं वह तुम नही जानते।
ज़मीन का रोना
जब अल्लाह ने आदम को पैदा फरमाना चाहा तो जिबरील को हुक्म दिया कि ज़मीन से मिट्टी ले कर आओ जिबरील आए और मिट्टी उठा कर जाने लगे तो ज़मीन रोने लगी और फरयाद करने लगी कि मिट्टी ले कर मत जाओ अल्लाह इस मिट्टी से इंसान बनाएगा और इंसानों में कुछ ऐसे गुनाहगार होंगे जिन्हें जहन्नम में डाला जाएगा और मुझ में इतनी कूवत नहीं कि मैं जहन्नम की आग बर्दाश्त कर सकूं, ज़मीन की बात सुन कर जिबरील को रहम आ गया और वह मिट्टी लिए बग़ैर वापस चले गए अल्लाह ने पूछा जिबरील क्या हुआ तो जिबरील ने सारा वाकिया बयान किया, फिर अल्लाह ने मीकाईल को भेजा कि तुम जाओ और मिट्टी ले कर आओ मीकाइल आए और मिट्टी ले कर जाने लगे तो फीर ज़मीन रोने गिड़गिड़ाने लगी ज़मीन की फरयाद सुन कर मीकाईल को भी रहम आ गया और वह भी मिट्टी लिए बग़ैर वापस लौट गए और अल्लाह को जा कर सारा हाल सुनाया, फिर अल्लाह ने इसराफील को भेजा कि तुम जाओ और मिट्टी ले कर आओ इसराफील भी आए और ज़मीन की आह सुन कर वापस चले गए, तब अल्लाह ने इज़राइल को भेजा कि तुम जाओ और ज़मीन से मिट्टी ले कर आओ इज़राइल आए और मिट्टी ले कर जाने लगे तो फिर ज़मीन रोने गिड़गिड़ाने लगी और कहने लगी कि मिट्टी मत ले जाओ अल्लाह इस मिट्टी से इंसान बनाएगा उस में कुछ गुनाहगार होंगे फिर अल्लाह उन्हें जहन्नम में डालेगा और मुझ में इतनी ताक़त नहीं कि मैं जहन्नम की आग बर्दाश्त कर सकूं, इज़राइल अलैहिस्सलाम ने ज़मीन की पूरी बात सुनी और कहा कि तुम्हारा फरयाद करना अपनी जगह सही है लेकिन मुझे उस मालिक ने मिट्टी ले जाने का हुक्म दिया है जो तुम्हारा भी मालिक है और मैं अपने मालिक का हुक्म नही टाल सकता इतना कह कर इज़राइल अलैहिस्सलाम मिट्टी ले कर चल दिए, अल्लाह की बारगाह में पहुंचे तो अल्लाह ने पूछा तुम कैसे मिट्टी ले आए? तो इज़राइल अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया मौला ज़मीन रो रही थी गिड़गिड़ा रही थी लेकिन तेरा हुक्म था तो मैंं ने उस की एक ना सुनी और मिट्टी ले आया।
इज़राइल अलैहिस्सलाम को मौत का फरिश्ता क्यों बनाया गया?
जब इज़राइल अलैहिस्सलाम ज़मीन से मिट्टी ले आए और ज़मीन रोती रही तो अल्लाह ने फरमाया इज़राइल ज़मीन से मिट्टी लाना आसान होता तो जिबरील मीकाईल और इसराफिल भी ला सकते थे लेकिन वह न ला सके और तुम ले आए अब जब मैं इस मिट्टी से इंसान बनाऊंगा और उस में रूह डालूंगा तो उस रूह को निकालना भी तुम्हारा काम होगा क्यों कि जिस तरह ज़मीन से मिट्टी लाना आसान नहीं था उसी तरह इंसान के जिस्म से रूह को निकालना भी आसान नहीं होगा इसी लिए यह जिम्मेदारी भी तुम्हे दी जाती है तब से इज़राइल अलैहिस्सलाम लोगों की रूह कब्ज करने में लगे हैं, बताया जाता है कि एक दिन में कम व बेश एक लाख लोगों की रूह निकाली जाती है।
इबलीस शैतान कैसे बना?
जब अल्लाह तआला ने उस मिट्टी से आदम अलैहिस्सलाम का पुतला तैयार किया फिर उस में रूह डाला तो फरिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदा करो सब ने सजदा किया लेकिन इबलीस खड़ा रहा और उस ने सजदा न किया इबलीस घमंड में चूर था क्यों कि वह फरिश्तों का टीचर था फरिश्तों को पढ़ाता था जन्नत में रहता था और अल्लाह की इबादत करता था उस ने इतनी इबादत की इतने सजदे किए थे कि अगर उस के सजदों को ज़मीन पर बिछाया जाए तो ज़मीन पर एक राई का दाना रखने के बराबर जगह बाक़ी न रहेगी लेकिन जब उस ने अल्लाह के हुक्म को मानने से इन्कार किया और आदम को सजदा न किया तो उस की सारी इबादतें बेकार हो गई सारे सजदे उस के मुंह पर मार दिए गए और हमेशा के लिए मरदूद क़रार दे कर जन्नत से निकाल दिया गया, इस से हमें यह सबक मिलता है कि हम सजदे हज़ार कर लें इबादतें लाख कर लें लेकिन अगर नबी की ताज़ीम से इन्कार किया तो हमारी सारी इबादतें सारे सजदे बेकार हो जाएंगे
आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से दुनिया में कैसे आए?
जब आदम का पुतला तैयार हुआ फिर उस में रूह डाली गई तब आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत में रखा गया वह जन्नत में अकेले थे तो अल्लाह ने उन के साथ रहने के लिए हव्वा को पैदा फ़रमाया आदम अलैहिस्सलाम ने जब हव्वा को छूना चाहा तो अल्लाह ने फ़रमाया ऐ आदम पहले हव्वा का महर अदा करो आदम अलैहिस्सलाम ने अर्ज किया ऐ अल्लाह मेरे पास तो कुछ भी नही है फ़िर मैं हव्वा का महर कैसे अदा करू? तो अल्लाह ने फ़रमाया ऐ आदम मोहम्मद पर 11 मरतबदुरूद पढ़ो तुम्हारा महर अदा हो जाएगा फ़िर आदम अलैहिस्सलाम ने दुरूद पढ़ कर महर अदा किया और दोनों जन्नत में रहने लगे, अल्लाह ने दोनों को हुक्म दिया कि जन्नत की हर चीज़ हर फल खाना लेकिन एक फल के करीब मत जाना शैतान को मौका मिला वह बदला लेने के फ़िराक में था वह हव्वा के पास गया और कहने लगा कि इस फल में आखिर ऐसा क्या है जो अल्लाह ने तुम्हें मना किया है एक बार चख कर तो देखो, इबलीस की बात सुन कर हव्वा ने उस फल को तोड़ लिया और आदम के पास ले आई और कहने लगी कि एक बार यह फल खा कर देखते हैं कैसा है और दोनों ने मिल कर उस फल को खा लिया उस फल का खाना था कि दोनों को पाखाना की हाजत हुई अल्लाह ने फ़रमाया मैं ने तुम्हें इसी लिए इस फल को खाने से मना किया था लेकिन तुम ने इबलीस की बातों में आ कर मेरे हुक्म की तामील न की इसी लिए अब तुम जन्नत में नहीं रह सकते फिर अल्लाह ने दोनों को जन्नत से निकाल कर धरती पर भेज दिया, बताया जाता है की आदम को लंका की पहाड़ी पर और हव्वा को जद्दा में उतारा गया था दोनों एक दूसरे की तलाश में बरसों तक भटकते रहे और अल्लाह से अपनी गलती की माफ़ी मांगते रहे फ़िर आदम अलैहिस्सलाम ने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का वसीला ले कर अल्लाह की बारगाह में माफ़ी मांगी तो अल्लाह ने उनकी माफ़ी क़ुबूल कर ली और दोनों को मिला दिया फिर दोनों एक साथ रहने लगे फिर उन से बच्चे पैदा हुए।।।
आगे मैं अगली किस्त में बताउगा कि एक दिन में कितने बच्चे पैदा होते थे और उनकी शादी कैसे होती थी...।
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